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Showing posts with the label "दि ग्रेट डिक्टेटर" में चार्ली चैपलिन का भाषण

"तानाशाह खुद को आज़ाद करते हैं पर जनता को गुलाम बना लेते हैं"

माफ़ कीजिये, पर मैं कोई राजा नहीं बनना चाहता। यह मेरा काम नहीं है। मैं किसी पर राज करना या जीतना नहीं चाहता।  यदि संभव हो तो मैं हर किसीकी मदद करना चाहूँगा - यहूदी, गैर-यहूदी- अश्वेत - श्वेत। हम सभी एक दूसरे की मदद करना चाहते हैं। इंसान ऐसे ही होते हैं। हम एक-दूसरे की ख़ुशी में खुश रहते हैं, किसीकी पीड़ा में हमें ख़ुशी नहीं मिलती। हम एक-दूसरे से नफरत करना नहीं चाहते। इस दुनिया में हर किसीके लिए जगह है। और पृथ्वी समृद्ध है तथा सभी का पेट भर सकती है। ज़िन्दगी की राह मुक्त और खूबसूरत हो सकती है, पर हम रास्ता भटक चुके हैं। लालच ने हमारी आत्माओं में ज़हर घोल दिया है, दुनिया को नफरत से घेर लिया है, दुःख और रक्तपात में धकेल दिया है। हमने रफ़्तार विकसित की है पर हमने खुद को बंद कर दिया है। मशीन, जो हमें विपुलता देती है, ने हमें ज़रूरतमंद बना दिया है। हमारे ज्ञान ने हमें कुटिल बना दिया है। हमारी होशियारी ने हमें सख्त और निर्दयी बना दिया है। हम सोचते बहुत ज्यादा हैं और महसूस बहुत कम करते हैं। मशीनरी से ज्यादा हमें मानवता चाहिए। होशियारी से ज्यादा हमें करुणा और सहृदयता चाहि...