गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं और सतही तौर पर देखने पर यही दिख रहा है, जो कथित मुख्यधारा के मीडिया में उछाला जा रहा है कि चूंकि बीजेपी अपने बूते सरकार बनाने जा रही है यानी वह जीत गयी है। क्या सचमुच? विश्लेषण करेंगे तो पायेंगे कि इस जीत में बीजेपी की बड़ी नैतिक हार छिपी हुई है। यकीन नहीं आ रहा तो इन तथ्यों पर गौर करें। गुजरात में 22 सालों से बीजेपी का शासन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह प्रदेश है, गुजरात। वास्तव में गुजरात के कथित विकास मॉडल को प्रचारित कर ही बीजेपी ने 2014 में देश में सत्ता हासिल की थी। गुजरात हिंदुत्व की पहली प्रयोगशाला थी। बाबरी मस्जिद विध्वंस की बुनियाद बनाने के लिए तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने रथ यात्रा गुजरात के सोमनाथ से शुरू की थी। छह फरवरी 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद गुजरात में भी दंगे हुए थे। उन दंगों के बाद जैसा कि कई राज्यों में हुए चुनावों में हुआ, गुजरात में भी 1995 में बीजेपी सत्ता में आई। 2001 में आंतरिक संकट से जूझ रही पार्टी ने उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रचारक श्री मोदी को गुजरात में मुख्यमंत्री बनाया।...