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Showing posts with the label Cinema

एक अनूठे परिवार की कहानी: शॉपलिफ्टर्स

कल जापानी फि ल्म "शॉपलिफ्टर्स" देखी। देख कर स्तब्ध रह गया! दुनिया के सबसे अमीर माने जाने वाले देशों में से एक जापान की राजधानी टोक्यो के आऊटस्कर्ट्स पर एक झोपड़े में रहने वाले बेहद गरीब परिवार की कहानी। पहले दृश्य में बाप-बेटे को एक स्टोर से अपनी रोज़मर्रा ज़रूरतों के सामान की चोरी करते दिखाया गया है। दूसरे दृश्य में वह एक छोटी बच्ची को अपने घर के बाहर भूख से तड़पते और ठिठुरती रात में ठंड से कांपते देखते हैं और उसे 'घर' ले आते हैं। घर का गुज़ारा चलता है युवक की बूढ़ी मां की मामूली पेंशन, उसकी कंस्ट्रक्शन साईट पर अपनी अस्थायी नौकरी, जो बाद में एक दुर्घटना में पैर फ्रैक्चर हो जाने पर चली जाती है और पत्नी की एक लॉन्ड्री में अस्थायी नौकरी से। घर में एक सदस्य और है, बूढ़ी औरत की पोती (सौतेले बेटे की बेटी) जो एक ऐसे 'क्लब' में काम करती है जहां पुरुष यौन सुख के लिये आते हैं। परिवार की नई सदस्य को वापस उसके घर छोड़ आने का फैसला किया जाता है। बच्ची को खिला-पिलाकर सुलाने के बाद पति-पत्नी निकलते हैं। बच्ची को ठंड के कारण घर के बाहर छोड़ नहीं सकते थे। फैसला होता है बच...

वो लम्हे...

कुछ दिन पहले की बात है, इंडियन बैंक की किंग्स सर्कल शाखा में पैसे निकालने गया था वहां धीमी आवाज़ में एफएम चल रहा था जिस पर गाना बज रहा था, "हमें और जीने की चाहत न होती, अगर तुम न होते...2" गीत, जो फिल्म "अगर तुम न होते" का शीर्षक गीत था, ने इस फिल्म और श्रीदेवी की फिल्म "लम्हे" के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया और इस पोस्ट ने जन्म लिया। दोनों फिल्मों में एक पहलू कॉमन था, कहानी तो स्त्री की थी पर उसे पुरुष के नज़रिए से पेश किया गया था। श्रीदेवी के शनिवार रात को आकस्मिक निधन के कारण पहले "लम्हे" की ही बात करूंगा। यश चोपड़ा की 'समय से आगे' की फिल्म मानी जाने वाली "लम्हे" अनिल कपूर के किरदार के नज़रिए से बनायी गयी है। "लम्हे" की कहानी कुछ ऐसी है कि अनिल कपूर अपने से उम्र में बड़ी श्रीदेवी से एकतरफा प्यार करता है। श्रीदेवी की शादी किसी और से हो जाती है और एक बच्ची को जन्म देकर वह और उसका पति मर जाते हैं। बरसों बाद अनिल कपूर श्रीदेवी की बेटी जो उनकी हमशक्ल है, से मिलता है। श्रीदेवी (बेटी) अनिल कपूर से प्यार करने लगती है...

प्रेमचंद का साहित्य और सिनेमा

-गुलजार हुसैन प्रेमचंद का साहित्य और सिनेमा के विषय पर सोचते हुए मुझे वर्तमान फिल्म इंडस्ट्री के साहित्यिक रुझान और इससे जुड़ी उथल-पुथल को समझने की जरूरत अधिक महसूस होती है। यह किसी से छुपा नहीं है कि पूंजीवादी ताकतों का बहुत प्रभाव हिंदी सहित अन्य भाषाओं की फिल्मों पर है।...और मेरा तो यह मानना है की प्रेमचंदकालीन सिनेमा के दौर की तुलना में यह दौर अधिक भयावह है , लेकिन इसके बावजूद साहित्यिक कृतियों पर आधारित अच्छी फिल्में अब भी बन रही हैं।  साहित्यिक कृतियों पर हिंदी भाषा में या फिर इससे इतर अन्य भारतीय भाषाओं में अच्छी फिल्में बन रही हैं , यह एक अलग विषय है लेकिन इतना तो तय है गंभीर साहित्यिक लेखन के लिए अब भी फिल्मी राहों में उतने ही कांटे बिछे हैं , जितने प्रेमचंद युग में थे। हां , स्थितियां बदली हैं और इतनी तो बदल ही गई हैं कि नई पीढ़ी अब स्थितियों को बखूबी समझने का प्रयास कर सके। प्रेमचंद जो उन दिनों देख पा रहे थे वही ' सच ' अब नई पीढ़ी खुली आंखों से देख पा रही है। तो मेरा मानना है कि साहित्यिक कृतियों या साहित्यकारों के योगदान की उपेक्षा हिंदी सिनेम...

अनारकली को एक आदाब तो जरूर बनता है हुज़ूर!

आज अनारकली ऑफ आरा से मिलना हुआ। जैसे अनारकली को हीरामन न मिलता तो वह 'भीसी बाबू' को सबक ना सिखा पाती। वैसे ही अवि को मुक्ता न मिलती तो वह अनारकली न बना पाता। यह फ़िल्म जितनी अवि की है, उतनी ही मुक्ता और बिटिया सुर की भी है। अविनाश ने स्वरा और पंकज के साथ मिलकर 2 घंटे का बेजोड़ सांग जोड़ा है।  जब गर्दा मुंबई में उड़ रहा है तो बिहार और यूपी में तो यकीनन आग लगी होगी। 'देसी तंदूर' यानि कि स्वरा को इस फिल्म के लिए लंबे समय तक याद किया जाएगा। पंकज त्रिपाठी के लिए क्या कहा जाए। यह  शख़्स अभिनय करता नहीं बल्कि किरदार को जीता है। संजय मिश्रा एक सदाबहार अभिनेता हैं। यह उन्होंने फिर साबित किया है। फिल्म हंसाती-गुदगुदाती है तो रुलाती और आक्रोश भी पैदा करती है। यह फिल्म उन हज़ारों-हज़ार अनारकलियों की आज़ादी, आत्मसम्मान और स्वाभिमान की भी कहानी है, जो नाच-गाकर अपना गुज़र-बसर करती हैं। साफगोई से कहूं तो अविनाश फ़िल्म को बाकी फिल्मकारों की तरह थोड़ा और कमर्शियल टच दे सकता था। कथानक को देखते हुए उसके पास इसका भरपूर अवसर भी था। लेकिन संसाधनों की भारी कमी के बावजूद उसने ऐसा नहीं कि...

"तानाशाह खुद को आज़ाद करते हैं पर जनता को गुलाम बना लेते हैं"

माफ़ कीजिये, पर मैं कोई राजा नहीं बनना चाहता। यह मेरा काम नहीं है। मैं किसी पर राज करना या जीतना नहीं चाहता।  यदि संभव हो तो मैं हर किसीकी मदद करना चाहूँगा - यहूदी, गैर-यहूदी- अश्वेत - श्वेत। हम सभी एक दूसरे की मदद करना चाहते हैं। इंसान ऐसे ही होते हैं। हम एक-दूसरे की ख़ुशी में खुश रहते हैं, किसीकी पीड़ा में हमें ख़ुशी नहीं मिलती। हम एक-दूसरे से नफरत करना नहीं चाहते। इस दुनिया में हर किसीके लिए जगह है। और पृथ्वी समृद्ध है तथा सभी का पेट भर सकती है। ज़िन्दगी की राह मुक्त और खूबसूरत हो सकती है, पर हम रास्ता भटक चुके हैं। लालच ने हमारी आत्माओं में ज़हर घोल दिया है, दुनिया को नफरत से घेर लिया है, दुःख और रक्तपात में धकेल दिया है। हमने रफ़्तार विकसित की है पर हमने खुद को बंद कर दिया है। मशीन, जो हमें विपुलता देती है, ने हमें ज़रूरतमंद बना दिया है। हमारे ज्ञान ने हमें कुटिल बना दिया है। हमारी होशियारी ने हमें सख्त और निर्दयी बना दिया है। हम सोचते बहुत ज्यादा हैं और महसूस बहुत कम करते हैं। मशीनरी से ज्यादा हमें मानवता चाहिए। होशियारी से ज्यादा हमें करुणा और सहृदयता चाहि...

पांच-दिवसीय पटकथा लेखन कार्यशाला १ मार्च से

मुम्बई: व्हिसलिंग वुड्स और स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन मिलकर १ मार्च से ५ मार्च तक एक पटकथा लेखन कार्यशाला का आयोजन व्हिसलिंग वुड्स, मुंबई में कर रहे हैं. कार्यशाला के मुख्य संचालक वरिष्ठ फिल्म लेखक अंजुम राजाबली (द्रोहकाल, गुलाम, राजनीति) होंगे. उनके साथ जयदीप साहनी (चक दे इंडिया), शकुन बत्रा (कपूर एंड संस), गौरी शिंदे (डिअर ज़िन्दगी), जूही चतुर्वेदी (पीकू), अश्विनी अईयर तिवारी (निल  बट्टे सन्नाटा), श्रीराम राघवन (बदलापुर), श्रीधर राघवन (दम मारो दम), निखिल मेहरोत्रा (दंगल) और श्रेयस जैन (दंगल) नए लेखकों का मार्गदर्शन करेंगे. कार्यशाला में पटकथा लेखन के उपयोगी सिध्दांतों, नवरस थ्योरी, भारतीय पौराणिकी, कॉपीराईट लॉ, लेखकों के अनुबंध आदि पर मार्गदर्शन किया जाएगा. कार्यशाला में हिस्सा लेने के लिए स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन के सदस्यों के लिए शुल्क ८,५०० रुपये है, जबकि गैर सदस्यों के लिए ११,००० रुपये.

गाँधी फिल्म्स फाउंडेशन की लघु फिल्म प्रतियोगिता

मुंबई: गाँधी फिल्म्स फाउंडेशन ने महात्मा गाँधी के मूल्यों जैसे ईमानदारी, सादगी और अहिंसा को बढ़ावा देने के लिए एक लघु चित्रपट प्रतियोगिता का आयोजन किया है. महात्मा गाँधी की पुण्य तिथि ३० जनवरी को इस प्रतियोगिता की घोषणा की गयी जिसके तहत गांधीजी के मूल्यों को दर्शाती १० मिनट की एक फिल्म/वृतचित्र बनाने का आह्वान किया गया है. फिल्म/वृतचित्र किसी भी भाषा में हो सकता है. फिल्म/वृतचित्र इस साल ३० अप्रैल तक जमा किया जा सकता है. प्रतियोगिता विजेताओं के लिए प्रथम पुरस्कार २५,००० रुपये, द्वितीय पुरस्कार १५,००० रुपये और तृतीय पुरस्कार १०,००० रुपये है. चुनिन्दा फिल्मों को एक समारोह में प्रदर्शित किया जाएगा और प्रमोट किया जाएगा. प्रतियोगिता में देश भर से किसी भी उम्र के किसी भी पेशे या कार्य से जुड़े लोग और छात्र भी हिस्सा ले सकते हैं. प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है. प्रतियोगी अपनी फिल्म/वृतचित्र की दो डीवीडी गाँधी फिल्म्स फाउंडेशन, मणि भवन, मुंबई भेज सकते हैं. उन्हें इसके साथ-साथ लिखित में देना होगा कि यह कृति उनकी मौलिक कृति है और किसी तृतीय पक्ष के कॉपीराईट का उ...

गुलज़ार फिल्मोत्सव

मुंबई:  गीतकार, लेखक और फिल्मकार गुलज़ार के प्रशंसकों के लिए एक खुशखबरी है. गिरगांव चौपाटी स्थित भवन में ६ फरवरी से १० फरवरी के बीच गुलज़ार फिल्मोत्सव का आयोजन किया गया है. भारतीय विद्या भवन और सिने सोसाइटी मिलकर इसका आयोजन कर रही हैं. इसमें गुलज़ार साब की पांच फिल्मों परिचय, माचिस, कोशिश, मेरे अपने और आंधी का प्रदर्शन किया जाएगा. प्रतिदिन शाम सवा छह बजे फिल्म का प्रदर्शन होगा. प्रवेश नि:शुल्क है और पास भवन पर ३ फरवरी से सुबह १०.०० बजे से शाम ६.०० बजे तक प्राप्त किये जा सकते हैं. एक व्यक्ति को किन्हीं ३ फिल्मों के २ पास मिलेंगे. 

७वां यशवंत अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव २० जनवरी से

मुम्बई: सातवां यशवंत अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव २० जनवरी से २७ जनवरी तक यहाँ के चव्हाण सेंटर में आयोजित किया जाएगा. यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान, मुम्बई, पुणे फिल्म फाउंडेशन, मुम्बई विश्वविद्यालय और महाराष्ट्र सरकार की ओर से आयोजित इस फिल्मोत्सव में लगभग ७५ फ़िल्में दिखाई जाएंगी. फिल्मोत्सव के उद्घाटन समारोह में अभिनेता पंकज कपूर को अर्थपूर्ण सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया जायेगा जबकि  निर्देशक आशुतोष गोवारिकर स्मिता पाटिल स्मृति व्याख्यान देंगे. मास्टर क्लास चिली के कंपोजर जॉर्ज अर्रिअगाडा देंगे.  फिल्मोत्सव के लिए रजिस्ट्रेशन चव्हाण सेंटर में कराई जा सकती है और फिल्मोत्सव की  वेबसाइट www.yiffonline.com पर ऑनलाइन भी कराई जा सकती है.