यह ठीक है कि मध्यप्रदेश विधानसभा के मुख्य चुनाव से पहले उप-चुनावों में इंडियन नेशनल कांग्रेस लगातार जीत हासिल कर रही है ; पहले अटेर व चित्रकूट और अब मुंगावली व कोलारस विधानसभा। लेकिन लगता है पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान पराजय का हथौड़ा झेलते-झेलते कांग्रेस का माथा फिर गया है। वह लोकतंत्र की प्रस्थापना को ताक पर रखने के साथ-साथ इस बात को भी बिसरा चुकी है कि भारतवर्ष में लोकतंत्र बहाली की लड़ाई कांग्रेस की अगुवाई में ही लड़ी गई थी इसलिए इसकी मर्यादा और भावना बचाने में उसकी जिम्मेदारी कहीं ज्यादा है। लेकिन लोकतंत्र की मूलभावना के उलट मध्य प्रदेश में 15 सालों से सत्ता का वनवास काट रही कांग्रेस ने अब इच्छुक उम्मीदवारों से पैसा वसूलने का ऐलान कर दिया है। यह टिकट का खुल्लमखुल्ला सौदा नहीं तो और क्या है ? मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बावरिया ने फरमाया है- “राज्य में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी का टिकट मांगने वालों से 50,000 रूपए पार्टी कोष में जमा कराए जाएंगे जबकि महिलाओं , अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों को 50% की रि...