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Showing posts with the label कोई नहीं जी। व्यंग्य Koi Nahin Ji! Satire

रिपोर्टर की खोपड़ी, संपादक की नौकरी बचाने के लिए बैलेंस बनाये रखना जरूरी है

हर बार लंबी-चौड़ी भूमिका क्या बांधना? आपके खादिम को एक लाभार्थी मीडिया हाऊस की ‘स्टाईल शीट‘ मिल गई। उसमें बाकी सब तो ठीक था पर ‘दंगे कवर कैसे न करें?‘ सेक्शन काफी रोचक लगा जो यहां ब्लॉग के पाठकों से शेयर कर रहा हूं। ‘दंगे कवर कैसे न करें?‘ दंगे एक संवेदनशील मुद्दा हैं और हमारे प्रतिष्ठित मीडिया हाऊस व हमारे पत्रकारों की जिम्मेदारी भरी भूमिका को देखते हुए यह जानना जरूरी है कि दंगे कैसे कवर न किये जाएं क्योंकि जब हमारे संस्थान के सदस्य यह जान जाएंगे तो उन्हें इसका भी पता लग जायेगा कि दंगे कैसे कवर किये जाते हैं। इसलिए नीचे दिये टिप्स ध्यान से पढ़ें: धर्म न पूछो दंगाइयों का हिंसा करने वाले समुदाय का धर्म (यदि वह बहुसंख्यक समुदाय से हो तो) कभी न दें। इसके दो कारण हैं। एक उनकी भावनाएं आहत हो सकती हैं और संबंधित संवाददाता, संपादक संस्थान पर बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओें को आहत करने के आरोप में और दो समुदायों के बीच वैमन्सय बढ़ाने के आरोप में मुकदमेबाजी झेलनी पड़ सकती है और दंगाइयों को ज्यादा ही गुस्सा आ गया तो कार्यालय में तोड़फोड़ से लेकर स्टाफ के किसी सदस्य की खोपड़ी भी फूट सकती है और मुक...

‘शांति मार्च‘ में ‘गोली मारो‘ के नारे लगना, गोदी मीडिया के संपादक का धर्म संकट में फंसना

धर्म संकट गहरा था। गोदी मीडिया के क्या टीवी, क्या अखबार और क्या वेबसाईट, सभीके न्यूज़रूम में उस दिन यही माहौल था। यहां पेश है एक अखबार के न्यूजरूम में संपादक के केबिन में बुलाई गई बैठक का एक्सक्लूजिव ब्यौरा। मामले की पृष्ठभूमि संक्षेप में यूं है कि शहर में 40 से ज्यादा जानें लेने वाली हिंसा थमने के बाद सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थन से एक शांति मार्च निकला। शांति मार्च में सत्तारूढ़ पार्टी के वह नेताजी भी शामिल थे, शामिल क्या थे, नेतृत्व ही वही कर रहे थे, जिनके नाम भड़काऊ भाषण देने और हिंसा भड़कने का कारण बनने को लेकर प्राथमिकी दर्ज होते-होते रह गई थी। खैर, शांति मार्च कवर करने के लिए जिस रिपोर्टर को भेजा गया था, वह लौटकर अपनी खबर वरिष्ठ उप संपादक को दे चुका था। एक नज़र डालने के बाद वरिष्ठ उप संपादक ने खबर मुख्य उप संपादक को दे दी। मुख्य उप संपादक ने समाचार संपादक को और समाचार संपादक ने खबर संपादक के केबिन में भिजवा दी। पांच मिनट के अंदर संपादक ने सबको केबिन में बुला लिया। संबंधित रिपोर्टर और चीफ रिपोर्टर को भी बुला लिया गया था और मीटिंग शुरू हो गई। संपादक : यह खबर हम कैसे छाप सकते हैं? ...