Skip to main content

Posts

Showing posts with the label Chandigarh

राष्ट्रवाद के समय में लेखकों की भूमिका

एम. हामिद अंसारी लेखक चूंकि लोगों के नज़रिए को प्रभावित करते हैं और उनके विचारों को आकार देने में मदद करते हैं, इसलिए लेखकों की एक सामाजिक जिम्मेदारी है. पाठक वर्ग उनके लेखन से ही उनके सामाजिक उद्देश्य, विवेक की गहराई और भावनात्मक ईमानदारी को परखता है. इसीलिए उनका कार्य समकालीन सांस्कृतिक आचार-विचार और राष्ट्रीय पहचान को प्रतिबिम्बित करता है और करना चाहिए. इस तरह यह महत्वपूर्ण सवाल हमारे समक्ष आता है: भारतीय राष्ट्रीय पहचान क्या है? इस सवाल का जवाब देने के दो तरीके हो सकते हैं: पहला  निगमनात्मक होगा, तथ्यों अथवा अनुभव से स्वतंत्र: दूसरा विवेचनात्मक होगा, तथ्यों और अनुभव पर आधारित. पहला स्वीकृत परंपरा की अचूकता, समानता, एकरूपता, अखंडता की वकालत करता है. दूसरा ज़मीनी सच्चाई पर आधारित विभिन्नता, विविधता, जटिलता को पहचानता है. यह स्वयंसिद्ध सत्य है कि सभी नज़रियों को प्रत्यक्ष तथ्यों की कसौटी पर परखना होता है. तो भारत के सामाजिक परिदृश्य की असल हकीकत क्या है? भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण संकेत देता है कि हमारी धरती पर शारीरिक बनावट, वेशभूषा, भाषा, पूजा के तरीकों, पेशे, खान...