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Showing posts with the label कोई नहीं जी! व्यंग्य

कब्रिस्तान की सैर कर लो!

क्रिएटिविटी पर कान्वेंट में पढ़े या मीडिया/विज्ञापन एजेंसियों में कार्य करने वालों का एकाधिकार नहीं है, यह सड़क पर मिले एक पर्चे से पता चला जो शायद किसी गाईड या ट्रेवल एजंट ने लिखा होगा । ज़्यादा लंबी चौड़ी भूमिका बनाये बिना पेश है उस पर्चे का पूरा मज़मून...  Brothers and their sisters, you are welcome to the graveyard. इतनी ही अंग्रेज़ी आती है इसलिये आगे की बात हिंदी में। पहला सवाल यहां के परिवहन का। देखिये, देशद्रोही मीडिया की खबरों पर मत जाइये। यहां सब नॉर्मल है। जगह-जगह सुरक्षाकर्मी आपकी सुरक्षा के लिये लगाये गये हैं। बैरीकेड आपको वाहनों के ओवर स्पीडिंग चालान से बचाने के लिये है। अब देखिये न, नये मोटर व्हीकल एक्ट में चालान की रकम कितनी बढ़ गई है तो हम जो मेहमान को भगवान मानते हैं, भगवान को लूटना नहीं चाहते। हर सौ कदम पर बैरीकेड इसलिये हैं। हाँ, कहीं-कहीं कर्फ्यू तो लगा हुआ है पर वह कोई आपके लिए थोड़े ही लगा है । वह तो देशद्रोहियों के लिए है, आप बिलकुल मत घबराइये और बस पहली फ्लाइट या गाड़ी से चले आइये ।     क्या कहा? मोबाईल और इंटरनेट बंद है? अजी, पिकनि...

ब्रेकिंग न्यूज़ : 'पद्मावती' पर पर्यावरण विभाग ने रोक लगाईं! कहा, "बहुत ध्वनि प्रदूषण फैला रही है!"

पर्यावरण विभाग ने फिल्म 'पद्मावती' पर रोक लगा दी है! विभाग का कहना है कि फिल्म बहुत नॉइज़ पोल्यूशन यानी ध्वनि प्रदूषण फैला रही है ।  विभाग के एक उच्चाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस ज्वलंत मुद्दे पर एक आपात बैठक बुलाई गयी थी जिसमें मंत्री का प्रतिनिधित्व उनके निजी सहायक ने किया। इस बैठक में सर्वसम्मति से फिल्म को बैन करने का फैसला लिया गया। फैसले के अनुसार फिल्म को सिर्फ भारत में ही नहीं 'प्लेनेट अर्थ' पर बैन किया गया है क्योंकि ध्वनि प्रदूषण की समस्या सिर्फ भारत में तो है नहीं। बैठक के मिनट्स (जिसकी कॉपी इस संवाददाता के पास है) के हवाले से ख़ास अपने पाठकों के लिए हम यह सुपर एक्सक्लूसिव   रिपोर्ट आपके सामने पेश कर रहे हैं: बैठक की शुरुआत गगनभेदी 'वन्दे मातरम' और समापन 'भारत माता की जय' के नारों से हुई। बैठक का एजेंडा रखते हुए एक उच्चाधिकारी ने कहा कि ऊपर से आदेश है कि कुछ करना होगा, हम कुछ नहीं कर रहे, इसलिए कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों को क़ानून और व्यवस्था बिगड़ने की आशंका का हवाला देकर फिल्म को बैन करना पड़ रहा है, इसमें यह संके...

ये विचार लेखक के अपने नहीं हैं!

कभी-कभी लगता है कि हम 'पल्ला झाड़ू' युग में जी रहे हैं, जहाँ सब समस्या या विवाद तो 'क्रियेट' करना जानते हैं, करते भी हैं पर फंसने पर उसे 'ओन' करना नहीं जानते। कोई भी, कोई भी यानी कोई भी अपने कहे-किये की जिम्मेवारी नहीं लेना चाहता। ज़रा सा विवाद हुआ कि वह उस विवादस्पद बयान/कार्य से पल्ला झाड़ लेता है यह कहकर कि ऐसा उसने कहा ही नहीं, उसकी बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, उसका यह मतलब नहीं था या कि यह उसके निजी विचार थे/नहीं थे। आखरी बहाना इस पर निर्भर करता है कि उसकी जान किस सूरत में बच सकती है। बरसों पहले टीवी पर एक धारावाहिक में 'डिस्क्लेमर' देखा था, यह धारावाहिक ऐसा कोई दावा नहीं करता कि यह इतिहास दर्शा रहा है, धारावाहिक के सभी पात्र काल्पनिक हैं और इसका उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन करना है वगैरह वगैरह।।। बाद में तो डिस्क्लेमर फैशन ही बन गया। फलां धारावाहिक का उद्देश्य बाल विवाह को बढ़ावा देना नहीं है, फलां धारावाहिक का उद्देश्य नारियों पर अत्याचार को बढ़ावा देना नहीं है, फलां धारावाहिक का उद्देश्य बच्चों के शोषण को बढ़ावा देना नहीं है, फलां धारावाहिक का उद...