जेएनयू के उप-कुलपति श्री एम. जगदीश कुमार की मांग सुनने के बाद से मन में एक सवाल उठ रहा था कि छात्रों को सेना के युद्धक टैंक अधिक प्रेरणा दे सकते हैं या हमारे महापुरुष और उनके रचे ग्रंथ ? उप-कुलपति यह भूल गए कि वह जेएनयू के कुलगुरु भी हैं और भारतीय वांङमय में कुलगुरु को छात्रों के लिए ब्रह्मा , विष्णु , महेश्वर और साक्षात् परब्रह्म ही बताया गया है। हालांकि इस सवाल का जवाब कुछ दिन बाद ही मिल गया जब उनकी मांग का समर्थन करते हुए भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान ज़ोर देकर कहा कि जेएनयू के छात्रों को राष्ट्रभक्ति की शपथ लेनी ही चाहिए। माना कि युद्धक टैंकों से कई शांतिपूर्ण काम भी लिए जा सकते हैं। मसलन , हमने ऐसी कई तस्वीरें देखी हैं जिनमें टैंकों पर बिठाकर लोगों को दुर्गम रास्ते पार कराए गए , मुस्कुराती हुई महिलाओं और बच्चों को टैंक पर सैर करवा कर उन्हें रोमांच से भर दिया गया। लेकिन ये अपवाद हैं। दुनिया भर में युद्धक टैंक भय का संचार करने और दमन का प्रतीक ही रहा है। टैंकों से इलाके फतह किए जाते हैं ; विद्रोह कुचले जाते हैं। दुश्मन की जीती हुई ज़मीन पर इन...