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जम्मू-कश्मीर प्रशासन-मीडिया संवाद जय-मौसी इश्टाईल

वैसे तो मैं उसूलन बासी खबर नहीं देता पर आगे की पंक्तियाँ पढ़कर आप समझ जायेंगे कि वजह जेन्युइन है। आठ-दस दिन पहले की बात है। जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन की एक 'ऑफ द रिकॉर्ड' और गुप्त प्रेस कांफ्रेंस हुई। पता है, आप कहेंगे कि प्रेस कांफ्रेंस 'ऑफ द रिकॉर्ड' और गुप्त कैसे हो सकती है? हुआ यूं कि प्रेस कांफ्रेंस शुरू होने से पहले प्रशासन ने कह दिया कि ब्रीफिंग के बाद सभी सवालों के जवाब दिए जायेंगे पर मीडिया को वायदा करना होगा कि वह प्रशासन की बातों से सहमत हैं तो प्रेस कांफ्रेंस की खबर कहीं नहीं छपेगी। मीडिया भूल जाएगा कि कोई प्रेस कांफ्रेंस हुई थी, हां चूँकि विषय प्रदेश में नार्मल्सी के बारे में था इसलिए मीडिया देशहित में 'उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार', 'गोपनीय एवं विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार', 'नाम न छापने की शर्त पर वरिष्ठ अधिकारी ने बताया' जोड़कर खबर दे सकता है। संवाद कुछ-कुछ 'शोले' के जय और बसंती की मौसी के बीच उस दृश्य की तर्ज पर हुआ जिसमें जय मौसी को बसंती की शादी अपने दोस्त वीरू से करने के लिए राज़ी करने की कोशिश कर रहा है। और आखिरकार मौसी क…
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आम चुनाव की चीरफाड़ करती है 'न्यू इंडिया में चुनाव'

अब जबकि आम चुनाव संपन्न हुए और नयी सरकार बने चार महीने से ज्यादा का समय गुज़र चुका है तो स्वाभाविक है कि 2019 के आम चुनाव का अन्त्य परीक्षण और विश्लेषण किया जाए। ऐसे में एक हिंदी पुस्तक का आना स्वागत योग्य ही माना जाना चाहिए। चन्द्र प्रकाश झा की ई-प्रकाशन संस्था नॉटनल से जारी हिंदी ई-पुस्तक 'न्यू इंडिया में चुनाव' इस अर्थ में सामयिक पुस्तक है। पुस्तक की भूमिका 'कुछ बातें' में श्री झा स्पष्ट कर चुके हैं कि यह ई-पुस्तक उनके यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया से सेवा निवृत्ति के बाद विभिन्न अखबारों और समाचार पोर्टल पर आम चुनाव को लेकर पिछले लगभग दो सालों के दौरान लिखे लेखों का संकलन है। पुस्तक में हालांकि लेख अलग-अलग न देकर उन्हें जोड़कर और (संभवत:) उप शीर्षकों की मदद से तीन आलेखों की शक्ल दी गयी है। इनमें मुख्य आलेख 'आम चुनाव 2019 के मायने', के साथ 'चुनावी बांड का गोरखधंधा' और 'एक राष्ट्र एक चुनाव जुमला के निहितार्थ' लेख शामिल हैं। मुख्य आलेख में चुनाव से पहले की परिस्थितियों से लेकर एग्जिट पोल और नतीजे आने तक विभिन्न पहलुओं की जांच की गयी है। इनमें चुनावी मा…

कंटीली तारों से घायल खबर : कश्मीर की सूचनाबंदी

(एनडब्ल्यूएमआई-एफएससी रिपोर्ट)
मुख्य निष्कर्ष : मीडिया पर बंदिशें और उसके निहितार्थ सरकार या सुरक्षा बलों के प्रतिकूल मानी जाने वाली रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले पत्रकारों पर निगरानी रखी जा रही है, उनसे अनौपचारिक'पूछताछ'हो रही है और उन्हें परेशान किया जा रहा हैज़मीन से पुष्ट की जा सकने वाली जानकारी को सोख दिया गया हैअस्पतालों समेत कुछ क्षेत्रों में आवाजाही पर पाबंदियांप्रिंट प्रकाशनों के लिए उपलब्ध सुविधाओं पर नियंत्रणअंतर्राष्ट्रीय और विश्वसनीय राष्ट्रीय मीडिया के तीन पत्रकारों को आबंटित सरकारी क्वार्टर खाली करने के मौखिक निर्देशअधिकारिक रूप से कर्फ्यू न होने के बावजूद पाबंदियां, बंदी के लिए कोई सरकारी अधिसूचना नहींलैंडलाइन केवल कुछ इलाकों में काम कर रही हैं, प्रेस एन्क्लेव में नहीं, जहाँ अधिकांश अखबारों के कार्यालय हैंईमेल और फ़ोन पर संपादकों से प्लेबैक और पूछे गए सवालों, खासकर तथ्यों की पुष्टि के बारे में, के जवाब न दे पाने के कारणराष्ट्रीय मीडिया में ख़बरें नहीं छप रहींस्पष्ट''अनौपचारिक" निर्देश कि किस तरह क…