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Showing posts with the label koi nahin ji! satire

"मैं इस हार की नैतिक औैर हर तरह से जिम्मेवारी लेता हूं..."

वह हर मायनेे में सबसे अलग पार्टी थी। इसलिए, हर चुनाव को गंभीरता से लेती थी चाहे वह गली-मोहल्ले का चुनाव हो या फिर किसी प्रांत या देश का। हर चुनाव में वोट पार्टी, देश और विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता के नाम पर ही मांगे जाते थे औेर अक्सर पार्टी जीत भी जाती थी या हार में भी जीत देख लेती थी। जैसे सीटें कम हुईं तो बढ़े हुए वोट प्रतिशत से खुश हो लेती। वोट प्रतिशत कम हुआ हो तो प्रत्याशियों के हार के अंतर को हाईलाईट किया जाता। कुल मिलाकर पार्टी में कभी किसी चुनाव में हार का ठीकरा किसीके सिर फोड़ने की नौबत लगभग नहीं ही आई थी। ऐसे में एक मिनी प्रांत में पार्टी की बेहद बुरी हार हुई। एक एसयूवी में भरकर विधानसभा भेजने लायक संख्या में इसके प्रतिनिधि चुने गये यानी दहाई का आंकड़ा भी नहीं छुआ और जहां तक वोट प्रतिशत का मामला है तो मिनी प्रांत के पिछले चुनाव के मुकाबले तो यह ज्यादा था, जो सुकून वाली बात थी लेकिन कुछ समय पहले हुए देश के चुनाव में इसी क्षेत्र से मिले वोटों के मुकाबले यह संख्या काफी कम थी। पार्टी सदमे में थी। ट्विटर पर अति सक्रिय रहने वाले नेताओं की उंगलियों को जैसे करंट लग गया था। पार्टी के...

कब्रिस्तान की सैर कर लो!

क्रिएटिविटी पर कान्वेंट में पढ़े या मीडिया/विज्ञापन एजेंसियों में कार्य करने वालों का एकाधिकार नहीं है, यह सड़क पर मिले एक पर्चे से पता चला जो शायद किसी गाईड या ट्रेवल एजंट ने लिखा होगा । ज़्यादा लंबी चौड़ी भूमिका बनाये बिना पेश है उस पर्चे का पूरा मज़मून...  Brothers and their sisters, you are welcome to the graveyard. इतनी ही अंग्रेज़ी आती है इसलिये आगे की बात हिंदी में। पहला सवाल यहां के परिवहन का। देखिये, देशद्रोही मीडिया की खबरों पर मत जाइये। यहां सब नॉर्मल है। जगह-जगह सुरक्षाकर्मी आपकी सुरक्षा के लिये लगाये गये हैं। बैरीकेड आपको वाहनों के ओवर स्पीडिंग चालान से बचाने के लिये है। अब देखिये न, नये मोटर व्हीकल एक्ट में चालान की रकम कितनी बढ़ गई है तो हम जो मेहमान को भगवान मानते हैं, भगवान को लूटना नहीं चाहते। हर सौ कदम पर बैरीकेड इसलिये हैं। हाँ, कहीं-कहीं कर्फ्यू तो लगा हुआ है पर वह कोई आपके लिए थोड़े ही लगा है । वह तो देशद्रोहियों के लिए है, आप बिलकुल मत घबराइये और बस पहली फ्लाइट या गाड़ी से चले आइये ।     क्या कहा? मोबाईल और इंटरनेट बंद है? अजी, पिकनि...

फासीवाद का लोकतंत्र के दरवाजे पर दस्तक देना, कर देना लोकतंत्र को बेघर!

(ठिठुरती रात थी। फासीवाद ने लोकतंत्र के दरवाजे पर दस्तक दी।) लोकतंत्र : (अंदर से) कौन है? फासीवाद : मैं फासीवाद। लोकतंत्र : क्या चाहिए? फासीवाद : बहुत ठंड है, दो घड़ी तुम्हारे घर बिताना चाहता हूं। लोकतंत्र : बस, दो घड़ी? फासीवाद : हां, यार। क्या सारी बातें अंदर बैठे-बैठे करोगे? (लोकतंत्र ने दरवाजा खोल दिया। फासीवाद अंदर जाकर कार्पोरेट के नरम लेकिन गरम सोफे पर बैठ गया।) फासीवाद : (सेटल होने के बाद) बहुत हालत खराब है भाई। थोड़ी दया करो। (लोकतंत्र पसीजने लगा। बहुत समय नहीं हुआ जब साम्राज्यवाद को ‘तड़ीपार‘ करने के बाद फासीवाद को भी घरनिकाला दिया गया था। फासीवाद के शरीर पर न के बराबर कपड़े थे जबकि लोकतंत्र समाजवाद की जैकेट, सर्वधर्म समभाव का मफलर और न्याय की टोपी आदि पहने था। सब पर प्रायोजक पूंजीवादी कंपनियों के लेबल लगे हुए थे।) लोकतंत्र : क्या चाहिए? फासीवाद : मफलर दे देते तो मेहरबानी होती (लोकतंत्र ने दे दिया। बाद में धीरे-धीरे फासीवाद ने लोकतंत्र को इमोशनल ब्लैकमेल कर जैकेट और टोपी भी ले ली। अब लोकतंत्र खुद ठिठुरने लगा। पर करता क्या उसने फासीवाद को घर में प्रवेश कराकर खुद अपने पैर...

यह गलत बात है!

(डिस्क्लेमर: इस लेख में शब्द मेरे हैं पर भावनाएं सत्तारूढ़ पार्टी के एक नेता की हैं। दरअसल हुआ यूं कि अपनी ट्रोल आर्मी के सदस्यों (यह मेरे शब्द हैं, उन्होंने 'सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स' लिखा था) से उन्होंने एक भावुक अपील की। मुझे लगा इस अपील को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाना चाहिए इसलिए यहाँ पेश कर रहा हूँ।) प्रिय सोशल मीडिया एक्टिविस्ट बंधुओं, पहले तो मैं आप लोगों की तारीफ़ करना चाहूँगा कि आप सोशल मीडिया पर देश, धर्म और समाज से जुड़े ज्वलंत मुद्दे उठाते रहते हो और जनता को जागरूक करते रहते हो। आप जो सवाल उठाते हो वह गंभीर और बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। बस, आपकी भाषा ज़रा गड़बड़ है। आप ही बताइये, सोशल मीडिया पर संवाद करते समय भाषा में क्या अश्लीलता, नफरत और हिंसा को उचित ठहराया जा सकता है? आपका बड़ा भाई होने के नाते मैं कहूँगा, "नहीं ठहराया जा सकता।" यह गलत बात है! ख़ास कर तब तो बिलकुल नहीं जब ऐसी भाषा का इस्तेमाल अपनों के खिलाफ ही किया जाए। क्या गैरों की कमी है जो हम अपनों को निशाना बनाएं? मित्रो, आपको यह तो सोचना चाहिए कि हमारे सुप्रीम लीडर आपको फॉलो करते हैं...